पूरे हफ्ते की एकसाथ खरीदते है सब्जी तो हो जाइए सावधान, वरना बाद में हो सकती है ये समस्या

Mohini Kumari
20 Min Read

सूरज की रोशनी में सात रंग हैं। 7 रंग भी होते हैं। सात रंगों की भी आवश्यकता होगी अगर स्वस्थ शरीर का लक्ष्य पूरा करना है। हर दिन सात अलग-अलग रंगों की सब्जियों, सलादों और फलों को अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए।

खाना उनके शरीर में सेहत की शक्ति बनाए रखेगा। लेकिन इनका भोजन कैसे होता है? क्या ध्यान देना चाहिए? क्या आप इन्हें खाकर अपना वजन नियंत्रित कर सकते हैं? क्या खाना भी हानिकारक है? ऐसे ही सवालों के जवाब देश के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों से लिए गए हैं।

इन बातों को ध्यान में रखें

थोड़ा रोटी का टुकड़ा सब्जी की ग्रेवी में डालकर लोग काम करते हैं। ऐसा करना नहीं चाहिए। जब भी सब्जी खाएं, चावल या चपाती की तुलना में हर बाइट में सब्जी की मात्रा बराबर या दोगुनी होनी चाहिए।

रोजाना एक कटोरी हरी सब्जी खाने की आदत डालें। दरअसल, शरीर साग-सब्जियों में पाए जाने वाले विटामिन-B और C को संरक्षित नहीं कर सकता। इसलिए शरीर इन्हें हर दिन चाहिए।

रात में दाल पकाने की तैयारी करना और सुबह दाल पकाने की तैयारी करना दोनों सही होता है। दस से बारह घंटे के लिए दाल को पानी में डालने से कुछ घातक तत्व बाहर निकल जाते हैं।

चावल-रोटी की तरह आलू

आलू एक पूरी सब्जी है। चावल, रोटी और आलू में भी बहुत स्टार्च होता है। शरीर को चावल या चपाती की तरह आलू भी काम करता है। जब आप आलू की सब्जी के साथ चावल या रोटी खाते हैं, तो आप चावल के साथ चावल खा रहे हैं।

सलाद बनाते समय पालक, मूली और बंद गोभी के हर पत्ते और लेयर को धोएं। एक लीटर में एक चम्मच नमक या विनेगर के साथ गुनगुने पानी में पाँच मिनट के लिए डुबो दें।

सलाद को किसी भी पार्टी में नहीं खाना चाहिए। क्योंकि ये कच्ची सब्जियां हैं यदि इन्हें सही तरीके से नहीं धोया गया है तो इन्हें संक्रमण का सबसे अधिक खतरा होता है। साथ ही, सड़क किनारे काटकर बेचे जा रहे सलाद से भी बचें।

चावल या चपाती के साथ आलू बेहतर है?

भूपेश (बदला हुआ नाम) पचास वर्ष के हो गए हैं। वह एक बैंक में काम करते हैं। पैसे बचाकर जमीन और घर बनाए। जीवन सही ढंग से खत्म हो रहा है। वह कुछ महीने पहले शाम को बैंक से निकल गया था। उन्हें कुछ कदम चले ही सिर चकराने लगा। जबकि कमजोरी पहले भी थी, सिर चकराने की समस्या पहली बार हुई थी।

उन्होंने बहुत कोशिश की, लेकिन वह गिर गया। अब उनमें इतनी साहस नहीं थी कि खुद उठ सकते थे। एक साथी उन्हें गिरते देखा तो दौड़कर उनका सहारा देकर उठाने की कोशिश की। भूपेश उठने की कोशिश करते हुए जमीन पर अपना एक पैर टिका नहीं पा रहा था।

उन्हें लगता था कि उनके पैरों की हड्डी टूट गई है। उन्हें यह नहीं समझ आ रहा था कि गिरते समय उनके पैरों को हल्का झटका लगाने के बाद हड्डी कैसे टूट गई। उन्हें जल्दी से डॉक्टर के पास ले जाया गया। भूपेश ने पूरी बात बताई, जो अच्छी बात है। सिर्फ हड्डी टूटने पर ही नहीं, चक्कर खाकर गिरने पर भी ध्यान दिया।

डॉक्टर ने खून, विटामिन, आदि की जांच लिखकर हड्डी का एक्सरे कराकर प्लास्टर करा दिया। रिपोर्ट प्रकाशित होने के बाद भूपेश के शरीर में अधिकांश विटामिंस की कमी थी। आयरन सहित बहुत से मिनरल्स कम थे। खून की बहुत कमी थी। प्री-डायबिटिक स्टेज भी दिखाई देती थी और बीपी भी बाउंड्री पार करने को तैयार था।

भूपेश को डॉक्टर ने डायबिटॉलजिस्ट के पास भेजा। फिर एक डायबिटिक एक्सपर्ट और उनके साथ एक डाइटिशन ने उनसे उनके खानपान और उनके दिनचर्या के बारे में पूछा। भूपेश ने कहा कि उनके खाने में आलू बहुत अच्छा होता है। इसके अलावा वे दाल, चावल और रोटी भी खाते हैं।

भूपेश से पूछा गया कि क्या वे हरी सब्जियां और सलाद कम बनाते हैं? भूपेश ने कहा कि हफ्ते में एक से दो बार होता है। फल भी ऐसे ही थे। फिर डॉक्टर ने उन्हें हर दिन मौसमी हरी सब्जी और सलाद खाने को कहा।

दिन में एक या दो फल खाने को कहा। उसने यह भी कहा कि अगर आप हर दिन आलू खाते हैं तो एक बार चावल या चपाती नहीं खाना चाहिए। दरअसल, चावल या चपाती के अलावा आलू में भी कार्बोहाइड्रेट, या स्टार्च होता है।

प्री-डायबिटिक स्टेज में होने के कारण कार्बो की मात्रा कम करें। इसके अतिरिक्त, उन्होंने धूप में समय बिताने और शारीरिक व्यायाम करने को भी कहा। भूपेश की हड्डियां अब मिल गई हैं। स्थिति काफी बेहतर हुई है, कुछ दिन पहले ही ब्लड टेस्ट कराया था।

क्यों जरूरी है मौसमी साग-सब्जी?

यह बेहतर है कि सब्जी स्थानीय और मौसमी हों। मौसमी सब्जियों को उगाने में कम पेस्टिसाइड और केमिकल फर्टिलाइजर की आवश्यकता होती है। इसलिए उनका स्वाद भी अच्छा है। उदाहरण के लिए, आजकल बाजार में ज्यादातर मीठी मूली मिलती है।

गर्मियों में आने वाली मूली अधिक मीठी नहीं होती। वह भी नरम नहीं है। ताजा मूली और उसके नरम पत्तों को सलाद या सब्जी के रूप में खाने का अपना ही स्वाद है। मूली पर बहुत सारे जोक्स हैं, लेकिन मूली में बहुत सारे गुण हैं।

फाइबर स्रोत

यह ताजा सब्जी फाइबर का सर्वश्रेष्ठ स्रोत है। भोजन को पचाने में ये फाइबर्स मदद करते हैं। शरीर को पर्याप्त पानी नहीं मिलने देते। सब्जियां, साग और सलाद की महत्वपूर्ण भूमिका आंखों की रोशनी, नसों का काम करना, स्किन और फेस पर ग्लो बनाए रखना, वजन को नियंत्रित करना आदि में है।

आप मौसमी मिर्च भी खाते हैं, तो यह हमारी छोटी आंत के लिए बहुत अच्छा है। हमारे शरीर के तमाम आवश्यक अंगों की मजबूती में इनकी भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। सब्जियों में अलग-अलग गुण हैं। इसलिए विभिन्न रंगों की सब्जियां खाना चाहिए।

7 रंग की सब्जी हर दिन खाएं

हर दिन सात रंग की सब्जियां खाने की कोशिश करें; अगर ऐसा नहीं हो सकता, तो तीन से चार रंग की सब्जियां भी खा सकते हैं। सफेद गोभी और बैंगनी दोनों अच्छे हैं।

लाल सब्जियां-फल

आपको गाजर, तरबूज, सेब और टमाटम खाना चाहिए। इनसे एक एंटीऑक्सीडेंट मिलता है जिसका नाम कैरोटिनॉइड्स है।

पीली सब्जियां-फल

संतरा, केला, पपीता आदि इनमें कई विटामिन्स भी हैं। ये विटामिन B6 के महान स्रोत हैं।

हरी सब्जियां-फल

बथुआ, अमरूद, पालक, घीया, भिंडी आदि ये आयरन और विटामिन-C के सर्वोत्तम स्रोत हैं।

सही सलाद खाने का तरीका

पश्चिमी देशों से अलग-अलग तरह का सलाद भारत में आया है। यहाँ चिकन, चीज़ पनीर आदि को सलाद के ऊपर डालने का भी प्रचलन है। भारत में भी सलाद खाने का चलन बहुत पहले शुरू हुआ था। सलाद में बंद गोभी, मशरूम, हरे पत्ते और अन्य खाद्य पदार्थ खाने का चलन आया।

कुछ रेस्तरां भी चल रहे हैं जहां आप भिन्न-भिन्न सलाद खा सकते हैं। कई लोग ड्राई फ्रूट्स को सलाद में मिलाकर खाते हैं। मुनक्का, अखरोट आदि इसमें मिलाया जाता है। कुछ लोगों ने उबले आलू भी मिलाया।

सलाद को किसी भी तरह से खाएं, लेकिन कच्चा सलाद खाते समय ध्यान रखें कि वह फ्रेश हो, अच्छे से धुला हुआ हो और कुछ भी नहीं हो। सलाद अच्छे से धुला नहीं होता तो उसमें कीट, वर्म और अन्य संक्रमण हो सकते हैं। सलाद में गाजर, चुकंदर, टमाटर, मूली, बंद गोभी, हरे मटर और अन्य सामग्री को मिलाकर खाने का चलन सबसे अधिक है।

बनाते समय इन पर ध्यान दें

आजकल काफी पेस्टिसाइड और फर्टिलाइजर्स हैं, इसलिए सलाद बनाने से पहले गाजर, मूली और अन्य सब्जियों को छील लें। 5 मिनट के लिए नमकयुक्त गुनगुने पानी में गाजर, चुकंदर, हरी मटर और टमाटर डालने से उनमें मौजूद फाइटोन्यूट्रियंट्स अधिक क्रियाशील हो सकते हैं। वहीं कीटों सहित अन्य जानवर भी मर जाते हैं।

सलाद खाने के लाभ

दरअसल, सलाद शरीर में एंटीऑक्सीडेंट बनाता है, जो दिन-प्रतिदिन बनने वाले घातक फ्री-रेडिकल्स को मार डालने में मदद करते हैं। हम एनर्जेटिक रहते हैं और हमारी प्रतिरक्षा भी बढ़ती है। हमारे शरीर की आंतरिक सूजन को कम करने में एंटीऑक्सीडेंट भी महत्वपूर्ण हैं। पनीर, चीज़ आदि इसमें मिलाया जा सकता है।

सब्जियों का इस्तेमाल कैसे करें

ताकि शरीर अधिक से अधिक पोषक तत्व प्राप्त करे, साग-सब्जियों को खरीदने, काटने, धुलाने और पकाने का सही तरीका होना आवश्यक है। हम इन सभी का ध्यान नहीं रखेंगे तो पूरी तरह से पोषित नहीं होंगे।

खरीदते समय ध्यान दें

वीकली मार्केट में बहुत से लोग एक बार में पूरे हफ्ते की सामान खरीदते हैं। यह विधि सही है और गलत भी है। यह उन सब्जियों के लिए है जो जल्दी नहीं खराब होती हैं, जैसे आलू, प्याज, लहसुन आदि। गलत है अगर सब्जी जल्दी खराब हो जाती है।

इसलिए उन्हें एक से दो दिन में खाना चाहिए, जैसे पालक, बथुआ, भिंडी, घीया और गोभी। ताजा सब्जी खरीदने से पहले यह जरूर देखें। पत्ते मुरझाए नहीं होना चाहिए।

अगर मुमकिन हो तो सब्जी को तोड़कर देखें कि वह सूखी है या नहीं। रात में बाजार या हाट में सब्जी खरीदने जाते समय आप देखते हैं कि सब्जी पर उसी रंग की लाइट लगाई गई है।

उदाहरण के लिए, भिंडी, घीया आदि के लिए हरी रोशनी, गाजर, टमाटर के लिए लाल रोशनी, गोभी के लिए सफेद रोशनी आदि। इन कारणों से सब्जी के असली रंग और ताजगी का पता नहीं चलता।

कोशिश करें कि दिन या शाम में सब्जी खरीदें। दरअसल, विशिष्ट रंगीन प्रकाश केवल अंधेरे में लगाया जाता है।
रात में सब्जी खरीदने की जरूरत हो तो पहले रोशनी से दूर सब्जी को देख लें। आप मोबाइल टॉर्च का उपयोग कर सकते हैं अगर आवश्यक हो।
रंग की परत सब्जी पर तो नहीं चढ़ाई गई है। एक सब्जी उठाकर गौर से देखें। जिन सब्जियों को रंगने के लिए रंग दिया जाता है, अक्सर उन पर रंग के छोटे छींटे भी दिखते हैं।

धोते समय क्या करना चाहिए?

वहीं, सब्जी या साग लाने पर सबसे पहले सब्जियों (आलू, प्याज, लहसुन आदि) को तेज धार में धो लें। यह करने के लिए सब्जियों को एक टोकरी में रखें, टैप के नीचे रखें और उन्हें तेज धार दें। इस दौरान सब्जी को उलट-पुलट करते रहें ताकि हर तरफ से धुल जाए।

दरअसल, तेज धार से उस पर चिपकी गंदगी, कीट और कुछ केमिकल्स भी धुल जाते हैं। सब्जियों को ३-४ मिनट तक धोते रहें। अब बड़े बर्तन या टब में साग और सब्जी डालें। फिर नमक या विनेगर को हल्का गुनगुना पानी में मिलाकर उसमें डाल दें। इतना पानी डालें कि सभी सब्जियां डूब जाएं।

5 से 10 मिनट बाद फिर से सब्जियों को निकाल लें। आप चाहें तो साग को पांच मिनट में निकाल सकते हैं। ध्यान रखें कि मुलायम सब्जियां जल्दी निकाल लेना चाहिए। गुनगुने पानी में पत्ते वाली साग-सब्जियां अधिक देर रखने पर उनके पोषक तत्व पानी के साथ बह सकते हैं।

गोभी और टेपवॉर्म बंद

सलाद, सब्जी खाने से कभी-कभी फायदे भी होते हैं, लेकिन कभी-कभी नुकसान भी होता है। जब आप सब्जी या सलाद को सही तरीके से नहीं धोते, तो यह नुकसान होता है। बंद गोभी से टेपवॉर्म में संक्रमण की चर्चा बहुत हो चुकी है।

यह भी कहा गया कि कच्ची बंद गोभी का सलाद खाने से टेपवॉर्म ब्रेन में घुस गया और न्यूरोसिस्टीसर्कोसिस हुआ। पर कोई प्रमाण नहीं है कि बीमारी गंदी सब्जी या खराब पानी से हुई है। यह बीमारी भी हो सकती है अगर इन्फेक्टेड मांस भी सही तरीके से न पके।

काटते समय क्या ध्यान रखें

हम कुछ सब्जियां छीलकर खाते हैं। उनकी बाहरी परत निकाल दी जाती है। कभी-कभी इसकी जरूरत होती है और कभी-कभी हम इसे हटाते हैं ताकि ऊपरी परत में मौजूद कीट या केमिकल को हटा सकें। साथ ही, नेचुरोपैथी कहता है कि सब्जियों की बाहरी परत को हटाना नहीं चाहिए।

उसमें बहुत सारे मिनरल्स और विटामिन्स हैं। इनकी बातें भी सही हैं, लेकिन आज जब सभी जानते हैं कि खेतों में केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड का बहुत अधिक इस्तेमाल होता है। खेतों की मिट्टी का रासायनिक गुण भी बदतर हो रहा है।

ऐसे में, बाहरी परत को हटा देने पर सब्जियों को पकाने के लिए उनके स्लाइस काटने से पहले उन्हें धोने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। अक्सर सभी तरह की सब्जियां इसमें शामिल होती हैं।

क्यों नहीं धोना चाहिए काटने के बाद

यदि सब्जियों को काटने से पहले अच्छी तरह से धोकर गुनगुने पानी से साफ किया गया है, तो उन्हें काटने के बाद धोने की आवश्यकता नहीं होगी। सब्जियों में कई तरह के पानी में घुलने वाले विटामिन-B और विटामिन-C मिलते हैं।

किडनी रोगियों की बात अलग है

किडनी रोगियों के लिए शरीर में पोटैशियम का स्तर बनाए रखना महत्वपूर्ण है। शरीर में पोटैशियम का स्तर बढ़ने से दिल कुछ समस्याओं का सामना कर सकता है। ताकि सब्जी में पोटैशियम की मात्रा कम हो, किडनी पेशेंट को हमेशा सब्जियों को पहले दस मिनट के लिए उबालकर उसका पानी फेंकने के लिए कहा जाता है।

पकाने के दौरान सबसे महत्वपूर्ण कार्य

मकसद सिर्फ स्वाद नहीं होना चाहिए जब साग-सब्जी पकाते हैं। शरीर को उनमें मौजूद पोषक तत्वों का अधिक से अधिक लाभ मिलेगा। वास्तव में, आजकल लोग डीप फ्राई खाते हैं। ज्यादा तेल या घी में पकाने से सब्जी में मौजूद अधिकांश पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

सिर्फ स्वाद का पूरा होना मकसद है। जब भी सब्जी या साग पकाने की बात आती है, तो पहली बात यह है कि उन्हें कम समय के लिए तेल में फ्राई करना चाहिए; अगर उबालने की जरूरत हो तो उसी पानी से सब्जी की ग्रेवी बनाना चाहिए।

सूप कितना फायदेमंद

कच्ची चीजों की तुलना में इसके लाभ कुछ कम हैं। सब्जियों का सूप बनाते समय काफी देर तक गर्म करने से कई पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं। ज्यादा कठोर फाइबर्स सूप बनाने से सॉफ्ट हो जाते हैं। इसलिए सूप आसानी से पच जाता है। जब आप सूप में सॉस डालते हैं, तो यह खराब हो जाता है।

आधा से एक लीटर पानी में पालक, गाजर, शलजम, चुकंदर, मटर और अन्य सामग्री को उबालकर सूप बनाना सबसे अच्छा है। पकने के बाद, उसे बाउल से निकालकर थोड़ा जीरा पाउडर और काला नमक मिलाकर गर्मागरम पिएं।

नेचुरोपैथी खाना बनाने का तरीका

वैसे, नेचुरोपैथी का मानना है कि कुदरती उत्पादों को खाना बेहतर है। इसके बावजूद, कच्चा खाना पहले उबालना चाहिए। आप कुकर भी उबाल सकते हैं। दूसरी ओर, ग्रेवी को तैयार करना शुरू करें।

मिक्सी में दो से तीन देसी टमाटर, एक बिस्किट साइज का कच्चा नारियल, एक मुट्ठी धनिया पत्ता, पंद्रह से इक्कीस कड़ी पत्ते, एक छोटी मिर्च, आधा चम्मच भुना जीरा और स्वाद के अनुसार सेंधा नमक मिलाकर एक ग्रेवी में पीस लें। ग्रेवी पूरी तरह से तैयार हो गई।

इस ग्रेवी को उबली हुई सब्जी में कुकर में 10 मिनट के लिए डाल दें। गैस ऑन नहीं करना चाहिए। यह सब्जी पौष्टिक होगी। दिन में दो या तीन कटोरी ऐसी सब्जी खा सकते हैं।

सलाद वजन कम करने में भी मदद करता है

फाइबर और अन्य कई न्यूट्रियंट्स से भरपूर होने के कारण इनमें कैलरी कम होती है और आपको भूख लगती है। इसलिए वजन कम करना सरल है।
दैनिक भोजन में सलाद की मात्रा जितनी बढ़ाते हैं, उतना कम कार्बोहाइड्रेट (रोटी, चपाती, आलू) मिलता है। इससे शरीर में पहले से मौजूद फैट कम हो जाता है क्योंकि इससे शरीर को आवश्यक ऊर्जा मिलती है। वजन घटने लगता है
अगर किसी दिन चीटिंग करनी हो तो दिन भर सलाद ही खाएं। इससे चीटिंग का शरीर पर बुरा असर कम होता है। एक दिन में जमा हुई चर्बी भी घट जाती है। भी हमारा डाइजेशन सही है।
चेहरा ताजगी से भर जाता है। यदि कोई बीमारी नहीं है, तो खून, विटामिन या मिनरल की कमी अक्सर नहीं होती।

एक्सपर्ट पैनल

डॉ. पुष्पेश पंत (प्रसिद्ध फूड स्पेशलिस्ट), डॉ. एस. के. सरीन (डायरेक्टर, ILBS), आचार्य मोहन गुप्ता (प्रसिद्ध नेचरोपैथ), डॉ. महेश व्यास (डिन, ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ आयुर्वेद), बलराज सिंह (VC, SKN एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, जयपुर), डॉ. परमीत कौर (चीफ डाइटिशन, AIIMS), नीलांजना सिंह

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