होशियार लोग भी नही जानते चीनी और मिश्री के बीच असली फर्क, जाने सेहत के लिए अच्छी क्यों होती है मिश्री

Mohini Kumari
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डायबिटीज का प्रकोप भारत और पूरी दुनिया में बढ़ा है, इसलिए लोग शक्कर या चीनी जैसे मीठे पदार्थों को भी खोज रहे हैं। साथ ही वे जानना चाहते हैं कि क्या ऐसे समय में मीठा खाना पूरी तरह से बंद कर देना चाहिए या फिर चीनी का कोई दूसरा विकल्प है।

कई लोग मिश्री को चीनी की जगह देते हैं। यहां तक कि सेहतमंद लोगों को सिर्फ मिश्री खाने की सलाह दी जाती है। चीनी और मिश्री दोनों मिठास देते हैं। दोनों को देखने में बहुत अंतर नहीं है, लेकिन वे बहुत अलग हैं।

ज्यादातर लोगों को पता नहीं है कि मिश्री में कई प्रकार हैं, लेकिन इनमें से दो सबसे लोकप्रिय हैं। एक विशिष्ट क्रिस्टल आकार की मिश्री डली धागे से जुड़ी होती है। धागे वाली मिश्री भी एक आम नाम है। इसे असली मिश्री भी कहते हैं।

चीनी को मिश्री से अलग करने का सबसे आम तरीका है कि चीनी मिल में बनती है और मिश्री बारीक दानेदार होती है। आजकल चाय, पेय, मिठाई आदि में इसे मिलाया जाता है। चीनी घर आज हर घर में उपयोग होता है।

वहीं मिश्री अब केवल त्यौहारों और पूजा-पाठ जैसे अवसरों पर दी जाती है। इसका बहुत सारा आयुर्वेदिक उपचार है। लेकिन आजकल लोग घरेलू उपचार के लिए इसे रखने लगे हैं।

गन्ने चीनी या शक्कर बनाता है। इसके लिए विशिष्ट मशीन का उपयोग किया जाता है जिसमें विभिन्न रसायनों की मदद से गन्ने का रस पुनः तैयार किया जाता है। चीनी इस तरह से केवल मिल या फैक्ट्री में तैयार हो सकती है।

इन्हीं रसायनों से गन्ने का रस हरा हो जाता है, और तैयार चीनी सफेद हो जाती है। अंतिम चरण में इसे छोटे घनों के रूप में बनाया जाता है ताकि इसे फुटकर बेचने में आसानी हो।

वहीं, गन्ने रस के वाष्पीकरण से तैयार शुगर सिरप को पानी में मिलाकर क्रिस्टलीकृत करके ठंडा किया जाता है। इस प्रक्रिया में कोई केमिकल नहीं प्रयोग किया जाता, इसलिए मिश्री चीनी से बेहतर मानी जाती है।

मिश्री बनाने में बहुत मेहनत लगती है, लेकिन चीनी बनाना मशीनों से आसान होता है। इसके अलावा, चीनी मिश्री की तुलना में सस्ता भी है। मिश्री में रसायन नहीं होते, इसलिए चीनी से बेहतर है। जहां चीनी खाने से रक्तचाप बढ़ता है मिश्री खाने से खून में शुगर कम नहीं होता, बल्कि विटामिन और मिनिरल भी मिलते हैं।

मिश्री कई घरेलू उपचारों में उपयोगी है। यह बताया जाता है कि सौंफ, इलायची, मक्खन, दूध, आंवाला आदि के साथ खाने से अलग-अलग लाभ मिलते हैं। माना जाता है कि सिर्फ मिश्री खाने से खांसी दूर होती है।

चीनी खून में शुगर को बढ़ाती है, लेकिन यह डायबिटीज में मदद नहीं करती। चीनी भी वजन बढ़ाने में बहुत कम योगदान देता है।

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