राकेश टिकैत को मिलने जा रहा 21वीं सदी आइकॉन अवार्ड, अवार्ड लेने से पहले राकेश टिकैत ने रखी शर्त

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राकेश टिकैत को मिलने जा रहा 21वीं सदी आइकॉन अवार्ड, अवार्ड लेने से पहले राकेश टिकैत ने रखी शर्त

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत इन दिनों किसान आंदोलन को लेकर काफी प्रसिद्ध हो चुके हैं। पिछले 1 वर्ष से राकेश टिकट सैकड़ों किसानों के साथ दिल्ली में धरना आंदोलन कर रहे हैं। यह शायद अब तक का सबसे लंबा चलने वाला आंदोलन है जो राकेश टिकैत के नेतृत्व में चलाया जा
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राकेश टिकैत को मिलने जा रहा 21वीं सदी आइकॉन अवार्ड, अवार्ड लेने से पहले राकेश टिकैत ने रखी शर्त

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत इन दिनों किसान आंदोलन को लेकर काफी प्रसिद्ध हो चुके हैं। पिछले 1 वर्ष से राकेश टिकट सैकड़ों किसानों के साथ दिल्ली में धरना आंदोलन कर रहे हैं। यह शायद अब तक का सबसे लंबा चलने वाला आंदोलन है जो राकेश टिकैत के नेतृत्व में चलाया जा रहा है। इसीलिए लंदन की एक कंपनी जिसका नाम स्क्वायर वाटर मिलन कंपनी है उस में राकेश टिकैत को 21वीं सदी आइकॉन अवार्ड देने की घोषणा की है। राकेश टिकैत को यह अवार्ड आने वाले 10 दिसंबर को दिया जाना है।

राकेश टिकैत ने रखी शर्त

परंतु राकेश टिकैत ने यह अवार्ड स्वीकार करने से पहले एक शर्त रख दी है। राकेश टिकैत ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार किसानों की सारी मांगे मान नहीं लेती तब तक वे किसी भी पुरस्कार को स्वीकार नहीं करेंगे। राकेश टिकैत ने बताया कि जब तक केंद्र सरकार किसानों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर कानून की मांग को पूरा नहीं कर लेती तब तक वे किसी भी पुरस्कार को स्वीकार नहीं करेंगे। इसके साथ ही राकेश टिकैत की मांग है कि आंदोलन के दौरान शहीद हुए 700 किसानों को मुआवजा भी केंद्र सरकार दे। केंद्र सरकार ने वापस लिए कानून बता दें कि पिछले वर्ष केंद्र सरकार के द्वारा तीन खुशी सुधार कानून लाए गए थे। हालांकि यह कानून किसानों के हित में ही थे।

परंतु केंद्र सरकार इस कानून के फायदे किसानों को समझाने में नाकामयाब रहे जिसके कारण किसानों में इन कानूनों के खिलाफ आक्रोश बढ़ता गया। इसी सिलसिले में कृषि कानूनों की वापसी के लिए सैकड़ों किसान दिल्ली की सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन करते हुए बैठ गए और लगभग 1 वर्ष तक यह आंदोलन चलने के बाद केंद्र सरकार के द्वारा तीनों कृषि कानून वापस ले लिए गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद इस बात की जाहिर घोषणा की थी कि वे तीनों कृषि सुधार कानून वापस ले रहे हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सभी किसानों से क्षमा भी मांगी और कहा कि कृषि कानूनों के लिए फैलाए गए भ्रम के कारण जो तकलीफ किसानों को झेलनी पड़ी उसके लिए क्षमा मांगते हैं। इसके साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आंदोलन को खत्म करने की भी किसानों से अपील की थी परंतु कुछ किसान तो आंदोलन खत्म करके वापस लौट गए लेकिन कुछ किसान अभी भी अपनी कुछ मांगों को लेकर डटे हुए हैं।