कई बार हवा में उड़ते हवाई जहाज का जानबूझकर पेट्रोल निकाल देते है पायलट, जाने किस कारण पेट्रोल निकालते है पायलट

Mohini Kumari
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कभी-कभी हवाई सफर में पायलट को विमान का सारा तेल गिराना पड़ता है। हालाँकि ऐसे परिस्थितियां बहुत कम होती हैं, पायलट को इमरजेंसी के दौरान ऐसा करना पड़ता है। अब आप सोच रहे होंगे कि उस तेल के विमान के आसमान में ही गिरने पर धरती पर गिरने की कठिनाई कैसी होगी।

इसलिए, प्लेन से आसमान में गिराया गया तेल धुआं बनकर हवा में उड़ता है, न कि धरती पर। ठीक है, अब समझते हैं कि ऐसा समय कब आता है..।

एक घटना से इसे समझते हैं। बात 23 मार्च 2018 की है: एक विमान ने शंघाई से न्यू यॉर्क की ओर उड़ान भरी और 60 साल की एक महिला की अचानक तबीयत खराब हो गई। उस महिला को बेहोशी हुई और सांस लेने में तकलीफ होने लगी। इसलिए प्लेन के पायलट को इमरजेंसी लैंडिंग के सिवा और कोई विकल्प नहीं दिखाई दिया।

यद्यपि यह एक कठिन कार्य था, क्रू मेंबर्स ने निर्णय लिया कि इमरजेंसी लैंडिंग करनी पड़ेगी और विमान से 65 हजार पाउंड गैसोलीन को हवा में ही गिराना होगा। प्लेन में लगभग 20 हजार डॉलर का तेल डंप करने के बाद अलास्का में इमरजेंसी लैंडिग हुई, जिससे महिला यात्री की जान बचाई जा सकी।

फ्यूल डंपिंग क्या होता है?

अब सवाल उठता है कि इमरजेंसी लैंडिंग से पहले “फ्यूल डंपिंग” क्यों होता है? वास्तव में, विमान में भारी तेल वजन की वजह से इमरजेंसी लैंडिंग मुश्किल हो सकती है। इमरजेंसी लैंडिंग से पहले विमान का तेल गिराया जाता है और उसका वजन हल्का किया जाता है।

तकनीकी शब्दों में इसे “फ्यूल जेटिसन” कहते हैं। प्लेन केवल एक निश्चित वजन पर लैंड कर सकता है। इमरजेंसी लैंडिंग के दौरान विमान में अधिक तेल भरा होगा, जिससे उसका वजन अधिक होगा, इससे वह जल्दी धरती पर धक्का मारे और बहुत नुकसान होगा।

इमरजेंसी लैंडिंग कब होती है?

पायलट फ्यूल डंपिंग का निर्णय लेता है अगर फ्लाइट के दौरान कोई मेडिकल इमरजेंसी या मौत की स्थिति हो और विमान को उड़ान पर रखना ठीक नहीं होता है। ध्यान दें कि डंपिंग सिर्फ तेल को गिराना नहीं है, बल्कि विमान के चक्कर लगाकर अतिरिक्त तेल को तेजी से जलाना है।

लेकिन विमान का तेल भी हवा में गिर सकता है अगर किसी यात्री की मौत हो जाती है और फ्यूल को जलाकर खत्म करने का समय नहीं होता। पायलट और क्रू मेंबर इसका निर्णय लेते हैं।

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