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शादी के लिए लड़की ढूँढने वक्त लड़की में नही होने चाहिए गुण, वरना बर्बाद हो जाएगी शादीशुदा ज़िंदगी

आचार्य चाणक्य एक महान राजनयिक, राजनीतिज्ञ और महान शिक्षक थे। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में जीवन से जुड़े कई पहलुओं को प्रकाशित किया है। चाणक्य ने धर्म, न्याय, मित्रता, शत्रुता, विवाह, धन और प्रगति आदि से संबंधित कई नीतियों का वर्णन किया है। आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक के माध्यम से स्त्रियों के स्वभाव
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शादी के लिए लड़की ढूँढने वक्त लड़की में नही होने चाहिए गुण, वरना बर्बाद हो जाएगी शादीशुदा ज़िंदगी

आचार्य चाणक्य एक महान राजनयिक, राजनीतिज्ञ और महान शिक्षक थे। आचार्य चाणक्य ने नीति शास्त्र में जीवन से जुड़े कई पहलुओं को प्रकाशित किया है। चाणक्य ने धर्म, न्याय, मित्रता, शत्रुता, विवाह, धन और प्रगति आदि से संबंधित कई नीतियों का वर्णन किया है। आचार्य चाणक्य ने एक श्लोक के माध्यम से स्त्रियों के स्वभाव के बारे में बताया है। चाणक्य बताते हैं कि एक व्यक्ति को शादी करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। चाणक्य के अनुसार चार प्रकार की महिलाओं का विवाह नहीं करना चाहिए।

  1. सुंदरता ही सब कुछ नहीं है

चाणक्य कहते हैं कि महिलाओं की खूबसूरती ही सब कुछ नहीं होती। यदि कोई व्यक्ति सुंदरता के आधार पर शादी करता है, तो उसे बाद में पछताना पड़ सकता है। चाणक्य कहते हैं कि शायद उनका मन सुंदर शरीर से काला हो सकता है। ऐसे में व्यक्ति को भविष्य में मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

  1. संस्कार धर्म

चाणक्य के अनुसार संस्कारी स्त्री अपने घर को स्वर्ग बनाती है। लेकिन खराब शिष्टाचार परिवार में तनाव पैदा कर सकता है। जिससे आपसी कलह हो सकती है। चाणक्य का कहना है कि जिस स्त्री में संस्कार का अभाव हो उसे ऐसी स्त्री से विवाह करने से बचना चाहिए।

  1. नकारात्मक विचार

चाणक्य कहते हैं कि रिश्तों का सबसे अच्छा मूल्य होता है। रिश्ते में संतुलन बनाए रखने के लिए पति-पत्नी को लगातार तालमेल बिठाने की जरूरत है। नैतिकता के अनुसार जो महिलाएं आपस में झगड़ती हैं और रिश्ता खत्म करने की बात करती हैं। ऐसी महिलाएं परिवार में नकारात्मकता और दुख लाती हैं।

  1. लालची

चाणक्य के अनुसार धन की लालसा रखने वाली महिलाओं से बचना चाहिए। चाणक्य कहते हैं कि जिन महिलाओं के स्वभाव में लालच होता है, उनके लिए अच्छे और बुरे में कोई अंतर नहीं होता है। इस प्रकृति की महिलाएं उदारता से पैसा खर्च करती हैं। चाणक्य कहते हैं कि पैसा हमेशा सोच-समझकर खर्च करना चाहिए।

“वरियेत कुलजा प्रजनो विरुपम्पि कन्याकम।

रूपशीलां न नीचस्य विवाह: सदृशे कुले।।”

इस श्लोक में आचार्य चाणक्य ने कहा है कि विवाह के लिए किस प्रकार की स्त्री को चुनना चाहिए और किस प्रकार की स्त्री को इससे दूर रहना चाहिए। चाणक्य का मानना ​​है कि शादी के लिए हमेशा संस्कारी और बुद्धिमान महिला को ही चुनना चाहिए।