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Winter Olympic : बीजिंग ओलिंपिक का भारत ने किया बहिष्कार ,डोक्लाम विवाद से है सम्बन्ध

हम सभी जानते हैं, कि भारत और चीन के बीच काफी समय से सीमा को लेकर विवाद चल रहा है। भारत और चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद का असर बीजिंग में होने वाले शीतकालीन ओलंपिक खेलों पर भी देखने को मिला है, खबरों की माने तो भारतीय राजनायिकों ने बीजिंग ओलंपिक में शामिल होने से इनकार कर दिया।

चीन ने शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में एक सैन्य कर्मी को मशाल वाहक बनाया था, जिसका विरोध भारत में किया गया। ये सैन्य कमांडर गलवान घाटी में भी उपस्थित था। पिछले साल भारत और चीन के बीच जबरदस्त झड़प भी देखने को मिली थी। जिसमें भारत कि कुछ सैनिक भी शहीद हो गए थे, वहीं चीन के भी कुछ सैनिक मारे गए थे।

चीन ने ओलंपिक गेम्स में घोली राजनीति

भारत के विदेश मंत्रालय ने चीन के इस रवैये पर पूरी तरीके से ऐतराज जताया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार बीजिंग में भारत के कार्यवाहक राजदूत ओलंपिक उद्घाटन या फिर समापन में पार्टिसिपेट नहीं करेंगे। इसके पीछे का कारण है, कि चीन ने ओलंपिक जैसे विश्व प्रसिद्ध टूर्नामेंट में राजनीति घोल दी है। और खुद को सर्वश्रेष्ठ दिखाने के लिए उन्होंने भारत को नीचा दिखाने की सोची है।

भारत ने UNSC में भी उठाये सवाल

चीनी सैन्य कमांडर क्यूई फैबाओ को मशाल वाहक बनाए जाने के बाद भारत ने इस मुद्दे पर UNSC में अभी खुलकर अपनी आवाज उठाई है, UNSC (संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद) में एक बैठक हुई, जिसमें भारत ने इस मुद्दे को लेकर सवाल जवाब किया। भारत ने कहा कि गलवान घाटी क्षेत्र और इसके बाहर शांति स्थापित करने के लिए भारत शुरू से ही राजनीति और सैन्य स्तर पर लगातार बातचीत करके मसले को सुलझाने की कोशिश कर रहा है। जिससे दोनों देशों के बीच एक शांतिपूर्ण समाधान निकल सके लेकिन चीन ऐसा होने नहीं दे रहा है।

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया भी कर चुके है बहिष्कार

अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया जैसे बड़े देश भी चीन के अड़ियल रवैये के खिलाफ अपनी नाराजगी की प्रतिक्रिया दिखा चुके हैं। ज्यादातर देश चीन का विरोध कर रहे हैं। भारत से पहले अमेरिका ने जब बीजिंग ओलंपिक के डिप्लोमेटिक बॉयकॉट की बात कही थी, तब चीन ने भी धमकी भरे लहजे में अमेरिका को करारा जवाब दिया था।

चीन सदैव से ही खुद को सर्वश्रेष्ठ समझता आ रहा है, चीन सरकार को पहले से ये आशंका थी कि चार देशों ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के बॉयकॉट के बाद कुछ अन्य देश भी विंटर ओलिंपिक का खुलकर बहिष्कार कर सकते हैं। लेकिन अब भारत भी अपने रवैए को चेंज कर चुका है और चीन के खिलाफ आवाज उठा रहा है।

Nausheen Ejaz

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